Tuesday, 28 December 2021

Modem क्या है 1 -और कितने प्रकार के होते हैं====!

Modem का Full Form होता है “Modulator / Demodulator.” यह एक ऐसा hardware component होता है जो की allow करता है एक computer या दुसरे device को, जैसे की एक router या switch, को Internet के साथ connect होने के लिए

Monday, 25 October 2021

iformation of CPCT

            CPCT

Computer proficiency certification Test

CPCT परीक्षा मुख्यतः 2 भागों में होती हैं जिनमे पहला कंप्यूटर/अंक गणित/सामान्य ज्ञान का पेपर होता है जो 75 मिनट का होता है | इसमें बहुविकल्पी प्रश्न पूछे जाते हैं जो कंप्यूटर, सामान्य ज्ञान, अंक गणित से जुड़े होते हैं |

दुसरे भाग में हिन्दी एवं अंग्रेजी टाइपिंग का टेस्ट होता है | हिन्दी एवं अंग्रेजी दोनों टाइपिंग टेस्ट के लिए आपको 15-15 मिनट का समय मिलता हैं  

अंग्रेजी टाइपिंग Passing marks 30 word Par Minits

हिन्दी टाइपिंग Passing marks 20 word par mini





इस परीक्षा में मुख्यतः कंप्यूटर एवं टाइपिंग के सब्जेक्ट पर ज्यादा फोकस किया गया है उसके आलावा यह परीक्षा 2 भागों में होती है जिसमे पहले भाग में निम्न विषय होते है


  • Computer proficiency, कंप्यूटर प्रोफेसिन्सी, समझबूझ कर पढ़ना, ,  जनरलों के बारे में
  • Reading comprehension, पढ़ने की क्षमता
  • Quantitative aptitude, मात्रात्मक रूझान
  • Genral mental ability and reasoning, सरल मानसिक क्षमता और तर्क
  • Genral awarnes | सामान्य जागरूकता

दुसरे भाग में टाइपिंग के 2 पेपर होते हैं हिन्दी एवं इंग्लिश |

सीपीसीटी (CPCT) परीक्षा से जुड़ी अन्य जानकारी

  • इसके लिए आपको 660 परीक्षा शुल्क देना होगा |
  • CPCT स्कोर कार्ड की वैधता 2 वर्ष के लिए होगी |
  • हर 2 माह में CPCT परीक्षा आयोजित होती है |
  • एक बार CPCT में फ़ैल होने पर 6 माह बाद ही आवेदन कर सकते है |

तो दोस्तों यह थी CPCT से जुड़ी कुछ सामान्य जानकारी जो कि पिछले आधारित हैं इन्टरनेट एवं CPCT की वेबसाइट पर | आपको यह पोस्ट कैसी लगी हमें कमेंट में बता सकते हैं साथ ही कोई सुझाव या कोई प्रश्न हो तो आप कमेंट कर सकते हैं | इस पोस्ट “सीपीसीटी (CPCT) क्या है, कैसे करें पूरी जानकारी हिंदी में” को अपने दोस्तों  में शेयर करना एवं हमारे facebook page को लाइक करना ना भूलें | धन्यवाद 

Tuesday, 3 August 2021

BCA Course ki -फुल इन्फॉर्मेशन

pankaj sir

 BCA Course- कोर्स, कॉलेज, योग्यता, फीस, कैरियर स्कोप , फ्रेंड्स आज की इस पोस्ट में हम आपको BCA Course की जानकारी देंगे, कि BCA Course Kya hai। BCA me career कैसे बनायें। BCA Course Fees क्या है। BCA Course कंहा से करें। Best BCA college इंडिया में कौन से हैं। किस कॉलेज से बीसीए कोर्स करें। After BCA Course इसमे कैरियर के ऑप्शन क्या है। यानी कि इस पोस्ट में हम BCA Course की 
फुल इन्फॉर्मेशन देंगे

BCA Course Details In hindi

बीसीए की फुल फॉर्म Bachelors in Computer Application है। यह तीन बर्षीय कंप्यूटर एप्पलीकेशन का अंडरग्रेजुएट कोर्स है। इसमे 6 सेमेस्टर होते हैं।BCA (Bachelors in Computer Application) कोर्स उन स्टूडेंट्स के लिए काफी अच्छा है, जो आईटी सेक्टर या कंप्यूटर साइंस में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं। BCA course के अंतर्गत डाटाबेस, डेटा स्ट्रक्चर, नेटवर्किंग, प्रोग्रामिंग लैंग्वेज जैसे C, C++, जावा आदि की जानकारी दी जाती है


Career Scope in BCA


वर्तमान समय मे कंप्यूटर और इंटरनेट मानव जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। लगभग हर सेक्टर में इंटरनेट और कंप्यूटर की मदद से काम लिया जा रहा है। कंप्यूटर और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के बढ़ते स्कोप के कारण इस  सेक्टर में एक्सपर्ट लोगों की काफी डिमांड बढ़ रही है। BCA Course के माध्यम से कंप्यूटर इंजीनियर या सॉफ्टवेयर डेवलपर, सॉफ्टवेयर डिज़ाइनर या प्रोग्रामिंग के क्षेत्र में आकर्षक कैरियर बनाया जा सकता है।



आईटी सेक्टर में आप इंडिया के अलावा विदेशों में जॉब के अवसर मिलते हैं। BCA कोर्स को पूरा करने के बाद आप मल्टीनेशनल आईटी सेक्टर की कंपनी, जैसे Oracle, IBM, इंफोसिस, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, टेक महिंद्रा, विप्रो, एचसीएल, डेल आदि  में शानदार कैरियर बना सकते हैं। आईटी सेक्टर में प्राइवेट सेक्टर में नौकरी की कमी नही है। अगर आपके अंदर थोड़ा भी टैलेंट है, तो आप बेरोजगार नही रहेंगे।

इसका कारण ये है कि आज का युग कंप्यूटर का युग है। हर काम को अंजाम देने के लिए इंटरनेट और कंप्यूटर का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार अगर आपकी रुचि कंप्यूटर साइंस में है, तो BCA Course के माध्यम से आप अपने कैरियर को नई दिशा दे सकते हैं।
इसके अलावा आप गवर्नमेंट सेक्टर में इंडियन आर्मी, पुलिस, नेवी, एयरफोर्स, बैंकिंग सेक्टर, रेलवे, एसएससी,एजुकेशन सेक्टर आदि में समय – समय पर आईटी एक्सपर्ट की वेकैंसी निकलती रहती हैं।


फिलहाल BCA एक ऐसा कोर्स है जिसकी डिमांड आज के समय मे हर फील्ड में हैं। आप किसी भी सेक्टर को ले लें, हर जगह आईटी का बोलबाला है। इस तरह हम कह सकते है कि आज के दौर में BCA Course में अच्छे कैरियर की काफी संभावनाएं मौजूद हैं।


Career Option in BCA


बीसीए कोर्स के बाद अनेक कैरियर के ऑप्शन मिल जाते हैं। आप इनमें से किसी में भी कैरियर बना सकते हैं।कंप्यूटर प्रोग्रामरवेब डिज़ाइनरएप्लिकेशन डिज़ाइनरगेम डिज़ाइनरडेटाबेस एडमिनिस्ट्रेटरबिजनेस एनालिस्टइनफार्मेशन सिस्टम मैनेजरसॉफ्टवेर प्रोग्रामरसॉफ्टवेयर इंजीनियरकंप्यूटर सपोर्ट सर्विस स्पेशलिस्टसॉफ्टवेयर डेवलपरसॉफ्टवेयर टेस्टरप्रोग्रामरसॉफ्टवेयर कंसल्टेंट


Qualification For BCA Course


बीसीए कोर्स के लिए आप पीसीएम सब्जेक्ट से 12वीं कम से कम 50% अंको से पास होना चाहिए। कुछ यूनिवर्सिटी में BCA Course के लिए आवश्यक योग्यता किसी भी स्ट्रीम से 12 वीं पास हो। सरकरीं कॉलेज में एडमिशन एंट्रेंस एग्जाम क्वालीफाई करने पर ही मिलता है। वंही कुछ गवर्नमेंट कॉलेज में एडमिशन 10+2 में प्राप्त अंको के आधार पर भी मिल जाता है। प्राइवेट कॉलेज या यूनिवर्सिटी में डायरेक्ट एडमिशन मिल जाता है।

BCA -बीसीए कोर्स के लिए संस्थान

 


  • गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली
  • अम्बेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली
  • रुहेलखंड यूनिवर्सिटी, बरेली
  • लखनऊ यूनिवर्सिटी
  • इलाहाबाद यूनिवर्सिटी
  • माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल
  • MS यूनिवर्सिटी, बड़ोदरा
  • देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी, इंदौर
  • जेवियर्स इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर एप्लिकेशन, अहमदाबाद
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, मुम्बई
  • छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी, कानपुर
  • मद्रास क्रिस्चियन कॉलेज, चेन्नई
  • द आक्सफोर्ड कॉलेज ऑफ साइंस, बैंगलोर
  • प्रेसिडेंसी कॉलेज, बैंगलोर
  • टेक्नो इंडिया यूनिवर्सिटी, कोलकाता
  • यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एनर्जी एंड स्टडीज, देहरादून
  • DAV कॉलेज, चंडीगड़
  • जामिया हमदर्द, नई दिल्ली
  • गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी, छत्तीसगढ़
  • गुरुकुल कांगिणी यूनिवर्सिटी, हरिद्वार
  • गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर
  • बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, झांसी
  • जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, दिल्ली

पहला पर्सनल कंप्यूटर IBM ने 1975 में बनाया था

 

pankaj sir 


अंतरराष्ट्रीय व्यापार मशीन निगम (International Business Machines Corporation) यानी IBM ने 1975 में पहला पर्सनल कंप्यूटर बनाया, जिसे व्यक्तिगत कंप्यूटर या पर्सनल कंप्यूटर (Personal Computer) कहा गया। यह एक माइक्रोप्रोसेसर तकनीक थी, जो किसी भी व्यक्ति के लिए घर या कार्यालय में उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया छोटा और अपेक्षाकृत सस्ता कंप्यूटर था। माइक्रो कंप्यूटर, डेस्क टॉप कंप्यूटर, लैप टॉप और  टैबलेट पीसी कंप्यूटर के ही उदाहरण हैं। इसमें भी डेस्क टॉप लघु उद्योग के लिए अधिक उपयोगी माना जाता है। पीसी दुनिया भर में प्रौद्योगिकी का एक सबसे महत्वपूर्ण अंग है। पीसी की डाटा प्रोसेसिंग क्षमताओं के कारण यह डाटा को सुरक्षित रखने में अधिक उपयोगी है। साथ ही पर्सनल कम्प्यूटर्स के लिए अधिकतर सॉफ्टवेयर इसके प्रयोग की सहजता तथा यूज़र फ्रेंडली होने को ध्यान में रख कर ही बनाए गए हैं। यही कारण है कि सॉफ्टवेयर उद्योग निंरतर पर्सनल कम्प्यूटर्स के नए उत्पादों को व्यापक श्रृंखला प्रदान करता रहा है।

आज दुनिया में कई कंपनियाँ कंप्यूटर निर्माण में संलग्न हैं। इसी दौड़ में शामिल लिनोवो (Lenovo) कंपनी ने लघु व्यापारियों के लिए थिंक सेंटर का M Tiny सीरीज लॉन्च किया है। यह सीरीज़ छोटे व्यापारियों के लिए एक बेहतर उपकरण है, इसे ख़ास तौर पर बढ़ रहे बिजनेस के लिए तैयार किया गया है। ये अपग्रेड होते हुए न सिर्फ स्पेस बचाता है, अपितु आपके डेस्कटॉप को कस्टमाइज भी करता है। यह ऊर्जा का संरक्षण भी करता है। साथ ही इसे डाटा संरक्षित करने के लिए बहुत स्पेस की भी जरूरत नहीं होती है। ये डेस्कटॉप कहीं भी फिट हो सकता है। M सीरीज के Tiny डेस्कटॉप आपको कुछ भी हैंडल करने की सुविधा प्रदान करते हैं। मल्टीटास्किंग और मल्टीमीडिया से लेकर ग्राफिक डिजाइन और हाइफाइनेंस तक के काम इस कंप्यूटर से संभव है।

जानिए भारत में कब आया था पहला कंप्यूटर और कैसे बन गया हर आदमी की जरूरत


  19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध और 20वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में कुछ पश्चिमी देशों की तकनीकी, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति में काफी बड़ा बदलाव आया, जिसे औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) कहा गया। धीरे-धीरे ये क्रांति पूरे विश्व में फैल गई। 1844 में “औद्योगिक क्रांति” शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम आरनोल्ड टायनबी ने अपनी पुस्तक “लेक्चर्स ऑन दी इंड्स्ट्रियल रिवोल्यूशन इन इंग्लैंड” में किया था। औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप यूरोप एवं उत्तरी अमेरिका में नये-नये उद्योग-धन्धे आरम्भ हुए। इसके बाद नयी-नयी आधुनिक तकनीकों के आगमन ने उद्योगों को जबर्दस्त बढ़ावा दिया। इसी कड़ी में शामिल हुआ 4×3 इंच की स्क्रीन वाला एक  मशीन, जिसने उद्योग के क्षेत्र में एक नयी क्रांति ला दी। आज से 79 वर्ष पहले यानी 1940 में किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि, यह छोटा-सा कंप्यूटर व्यापारियों को उनके मोटे-मोटे बही खातों से छुटकारा दिला देगा। बस, एक क्लिक में बड़ा से बड़ा हिसाब आसानी से किया जा सकेगा। भारी-भरकम ऑफिस का सारा काम 4×3 इंच के स्क्रीन में सिमट जाएगा। कंप्यूटर आज हर क्षेत्र में हर किसी की जरूरत बन गया है। अस्पताल हो या स्कूल, ऑफिस हो या मॉल या फिर आपका घर ही क्यों न हो, कंप्यूटर के बिना कोई भी काम करना अब असंभव-सा लगता है। आइए जानते हैं कंप्यूटर की शुरुआत कैसे हुई ? और व्यापार की दुनिया में कंप्यूटर इतना महत्वपूर्ण क्यों हो गया है ?

PANKAJ SIR 


ईसा की पहली शताब्दी में भी था कंप्यूटर











प्रथम शताब्दी में यांत्रिक रेखीय संगणक यानी यांत्रिक रेखीय (एनालॉग) संगणकों का प्रादुर्भाव शुरू हो गया था, जिन्हें बाद में मध्यकालीन युग में खगोल शास्त्रीय गणनाओं के लिए प्रयोग किया गया। द्धितीय विश्व युद्ध (1935-1945) के दौरान यांत्रिक रेखीय संगणक को विशेषीकृत सैन्य कार्यो में उपयोग किया गया। इसी दौरान पहले विद्युतीय अंकीय परिपथ वाले संगणकों का विकास हुआ। प्रारम्भ में वो एक बड़े कमरे के आकार के होते थे और आज के आधुनिक सैकड़ों निजी संगणकों के बराबर बिजली का उपभोग करते थे। 1940-1945 में पहला इलेक्ट्रॉनिक अंकीय संगणक का विकास यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका में किया गया था।

कंप्यूटर ने आसान बनाया काम और बचाया समय

आज व्यापार क्षेत्र में कंप्यूटर एक अहम् भूमिका निभा रहा है। कंप्यूटर ने न सिर्फ काम को आसान बनाया है, अपितु समय के सदुपयोग में भी मददगार सिद्ध हो रहा है। पहले ऑफिस में कागज़ों पर हाथ से लिख कर महत्वपूर्ण जानकारी सुरक्षित रखी जाती थी और ढेरों बही खाते भर जाते थे, वहीं आज कंप्यूटर ने इस समस्या को दूर कर दिया है। वेतन की गणना करनी हो या बाज़ार की जानकारी लेनी हो, किसी को पत्र लिखना हो या अपने व्यवसाय से संबंधित कोई विशेष जानकारी लेनी हो, कंप्यूटर की मदद से आसानी से ली जा सकती है।

भारत में 1952 में आ गया था पहला कंप्यूटर

1952 में भारत में कंप्यूटर युग की शुरुआत भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute) कोलकाता से हुई। इस आईएसआई में स्थापित होने वाला पहला एनालॉग कंप्यूटर भारत का प्रथम कंप्यूटर था। यह कंप्यूटर 10 X 10 की मैट्रिक्स को हल कर सकता था। इसी समय भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु में भी एक एनालॉग कंप्यूटर स्थापित किया गया था, जिसका प्रयोग अवकलन विश्लेषक के रूप में किया गया। इसके बाद 1956 में भारत के आईएसआई कोलकाता में भारत का प्रथम इलेक्ट्रोनिक डिजिटल कंप्यूटर HEC – 2M स्थापित किया गया और इसके साथ ही भारत जापान के बाद एशिया का दूसरा ऐसा देश बन गया, जिसने कंप्यूटर तकनीक को अपनाया था।

1966 में भारत ने विकसित कर लिया था पहला कंप्यूटर

1966 में भारत का पहला कंप्यूटर ISIJU विकसित किया गया।  इस कंप्यूटर को दो संस्थाओं भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute) और कोलकाता की जादवपुर यूनिवर्सिटी (Jadavpur University) ने मिल कर तैयार किया था। इसी कारण इसे ISIJU नाम दिया गया। ISIJU एक ट्रांजिस्टर युक्त कंप्यूटर था। इस कंप्यूटर का विकास भारतीय कंप्यूटर तकनीक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था। यद्यपि यह कंप्यूटर व्यवसायिक कम्प्यूटिंग आवश्यकताओं को पूर्ण नहीं करता था, जिस कारण से इसका प्रयोग किसी विशिष्ट कार्य के लिए नहीं किया गया। इसके बाद 90 के दशक में भारत का प्रथम सुपर कंप्यूटर ‘ परम 8000 ‘ का विकास किया गया, जिसका अर्थ था, parallel machine, जो कि आज सुपर कंप्यूटर की एक श्रृंखला है। परम का प्रयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया गया। बायोइन्फ़ोर्मेटिक्स, मौसम विज्ञान और रसायन शास्त्र के क्षेत्र में सुपर कंप्यूटर लोगों की पहली पसंद बन गया। यद्यपि पर्सनल कंप्यूटर के आ जाने के कारण आज भारत के घरों में, कार्यालयों में पर्सनल कंप्यूटर ही प्रयोग किया जाता है, हालाँकि एनालॉग, मेनफ्रेम तथा सुपर कंप्यूटर ने भारत को एक विकासशील देश बनाने में अमूल्य योगदान दिया है।

भारत की सबसे पहली फिल्म राजा हरिश्चंद्र थी

 भारत की सबसे पहली फिल्म राजा हरिश्चंद्र थी जो साल 1913 में बनाई गयी थी. इस फिल्म को बनाने का श्रेय दादा साहब फाल्के को दिया जाता है. दादा साहब फाल्के का जन्म 30 अप्रैल 1870 को तथा मृत्यु 16 फरवरी 1944 को हुई थी



भारत में पहला मोबाइल फोन

 

pankaj sir 

31 जुलाई 1995. यह वही तारीख़ है, जब देश में मोबाइल फोन से पहला कॉल लगाया गया था. साल 1995 में 31 जुलाई को केंद्र सरकार में तत्कालीन मंत्री सुखराम और पश्चिम बंगाल के सीएम ज्योति बसु के बीच पहला मोबाइल फोन कॉल लगाया गया था और दोनों ने बात की थी. सबसे पहले यही जानें कि आखिर उस पहले कॉल पर क्या बात हुई थी

ये देश में सबसे बड़ी क्रांति thi
दिल्ली स्थित टेलिकम्युनिकेशन्स विभाग से उस वक्त संचार मंत्री सुखराम ने ज्योति बसु को पहला मोबाइल फोन कॉल लगाया था. हिंदू बिज़नेस के मुताबिक़ उस वक्त पश्चिम बंगाल के सीएम बसु कोलकाता स्थित राइटर्स भवन में थे. इस कॉल पर सुखराम ने बसु से कहा था कि वायरलैस तकनीक पर आधारित टे​लीफोन की यह प्रणाली देश में सबसे बड़ी क्रांति साबित होने वाली है. और दोनों ही नेताओं ने इस उपलब्धि को महत्वपूर्ण माना था. यह पहला कॉल उस समय 16 रुपये प्रति मिनट की दर के हिसाब से लगा

 2015 में उमंग दास ने इकोनॉमिक टाइम्स के लिए लिखे लेख में पूरी कहानी विस्तार से बताई थी कि कैसे इस संचार क्रांति की कहानी शुरू हुई और अंजाम तक पहुंची. अस्ल में, 1994 में ज्योति बसु ने उद्योगपति भूपेंद्र कुमार मोदी के साथ मुलाकात में कहा था कि कलकत्ता वो शहर हो, ​जहां देश में सबसे पहले मोबाइल नेटवर्क पहुंचे. इसके बाद प्रोजेक्ट काउंटडाउन शुरू हुआ था. बीके मोदी अपनी टेलीकॉम कंपनी मोदी टेल्स्ट्रा के तहत जीएसएम नेटवर्क के लिए काम शुरू कर चुके थे. था इस मुलाकात के बाद बीके मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलियाई पार्टनर टेल्स्ट्रा के अलावा नोकिया से संपर्क कर तकनीकी मदद जुटाई और फिर नौ महीने बाद भारत में भारत में सेल्युलर सेवा का सपना हकीकत बना. इसके बाद चली विकास यात्रा से तो तकरीबन सभी वाकिफ हैं.

Saturday, 31 July 2021

Coding क्या है


 

दोस्तों आपके पास जरूर कोई न कोई स्मार्टफोन होगा, और आप उसमे बहोत सारी चीज़े भी सर्च करते होंगे, अपने बहोत सारी वेबसाइट भी अपने स्मार्टफोन में चलाई होंगी, तो दोस्तों क्या आपको पता है की ये वेबसाइट और सॉफ्टवेयर कैसे बनते हैं? ये बनते है Coding करके, जिसको की एक डेवलपर हे समझ सकता है और बना सकता है 


कंप्यूटर और मोबाइल में आजकल हर किसी की दिलचस्पी होती है, और आजकल हर कोई समय के साथ चलना चाहता ही. अगर आप कंप्यूटर प्रोग्राम, मोबाइल एप, वेबसाइट्स, गेम्स या फिर सॉफ्टवेयर में किसी भी चीज़ को सीखने और करने की रूचि रखते हैं, तो पहले आप को प्रोग्रामिंग सीखना होगी। प्रोग्रामिंग लेंग्वेज का प्रयोग कर के प्रोग्राम बनाए जाते हैं।

हमारे कंप्यूटर, मोबाइल, और वो सभी Smart devices जिनका उसे हम करते हैं, उनसभी में प्रोगरामिंग का उपयोग किआ जाता है. एक प्रोग्रामर बहोत म्हणत करके कोई भी प्रोग्राम को बनता है. वेबसाइट से लेकर सॉफ्टवर्स तक में बिना प्रोगरामिंग और कोडिंग के कुछ भी संभव नहीं है

सभी चीज़े स्मार्ट होती जा रही हैं, जैसे पहले हमे बैंक से पैसे निकलवाने पड़ते थे, फिर एटीएम से हम पैसे निकालने लगे, और अब हम घर बैठे जब चाहे तब किसी को भी ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर सकते है, और इसमें हमारा टाइम भी बहोत बचता है, और ज्यादा परेशा

Coding को प्रोग्रामिंग के रूप में भी जाना जाता है। कंप्यूटर पर हम जो कुछ भी करते हैं वो सारा काम इसी के जरिए किआ जाता है। Coding के जरिए ही कंप्यूटर को बताया जाता है कि उसे क्या करना है। यानी कंप्यूटर को जिस भाषा को समझता है उसे कोडिंग कहा जाता है। अगर आपको कोडिंग लैंग्वेज आती है तो आप बड़ी आसानी से वेबसाइट्स या ऐप बना सकते हैं। इसके अलावा भी कई सारी चीजें कोडिंग लैंग्वेज से की जा सकती हैं, जैसे Artificial intelligence और रोबोटिक्स.

कंप्यूटर में हमे कोडिंग या प्रोगरामिंग नहीं दिखती है, हमे बस सामने की चीज़े दिखाई देती हैं, कोडिंग और प्रोगरामिंग में फ्रंट एन्ड और बैक एन्ड होता है, जिससे हम कंप्यूटर और स्मार्टफोन का उपयोग कर पाते हैं.

प्रोगरामिंग की बहोत सारी लैंग्वेज होती है, कोई वेब डेवलपमेंट के लिए तो कोई एंड्राइड ऐप्प डेवलपमेंट के लिए यूज़ किआ जाता है, जिसको की हर कोई व्यक्ति बिना नॉलेज के नहीं कर सकता है. प्रोगरामिंग या कोडिंग करने के लिए आपको इसका अच्छे से नॉलेज होना चाइये.नी भी नहीं होती है. तो चलिए जानते हैं की coding क्या है और इससे कैसे आप सीख सकते हैं


कुछ कोडिंग लैंग्वेज जो ज्यादा उपगोय होती हैं

  • C-Language
  • C++
  • Java Script
  • HTML
  • CSS
  • PHP
  • MYSQL
  • JAVA
  • .NET
  • RUBY
  • PYTHON

Thursday, 29 July 2021

Graphic Designing


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Graphic Designing आज के समय का सबसे famous कोर्स है क्योकि आज हम जिस तरफ भी देखते है वहां हमें Graphic Designing के कुछ न कुछ नमूने देखने को जरुर मिल जाता है जैसे stylish Text, Stylish Images और Combined color etc. ये सभी Graphic Designing के अंतगर्त ही आते है. वैसे हम सभी को वही चीज ज्यदा पसंद आता है जिसे हम सब ज्यदा बार देखते है या जिसके बारे ज्यादा सोचते है ठीक वैसे ही Graphic Design है हमें कही न कही Graphic Design के Graphics, Images Combined Color दिख ही जाते है, परिणामस्वरूप, हम उसपर attract हो जाते है, एवं उसके बारे जानने के इच्छुक हो जाते है

Graphic Design in Hindi एक तेजी से उभरता हुआ Industry बन रहा है जो आगे चलकर traffic का एक बहुत बड़ा हिस्सा Graphic Design से belongs करेंगा. जिसका सीधा मतलब है Attraction, क्योकि जो चीज हमें देखने में ज्यदा अच्छा लगता है अक्शर हम उसी के पीछे भागते है ठीक वैसे ही ग्राफ़िक डिजाइनिंग फील्ड है जिसे बहुत लोग पसंद करते है. पर हा जितना हम इसके बारे सोचते है उससे कही आगे ये है. Graphic Design in Hindi एक Arts Field है इसीलिए यह कोर्स उनलोगों के लिए बिलकुल सही है जिन्हें आर्ट्स आता है वो इसमें ज्यादा सुरक्षित महसूस करेनेगें.वैसे देखा जाए तो Graphic Design in Hindi के लिए minimum Qualification 12th ही है पर अगर आप Graduate हो आपके लिए और अच्छा है क्योकि 12th + Graphic Design कोर्स पर जॉब्स लेने में थोड़ी परेशानी होटी है लेकिन Graduate पर बिलकुल परशानी नही होती है और आसानी से जॉब्स मिल जाते है क्योकि Graduation एक undergraduate कोर्स होता है जो हर जहग Eligible होता है, और इतना ही नही आप इसे post Graduate के बाद भी कर सकते है जो आपके फ्यूचर को एक सुनहरा चांस देगा.

raphic Design को Communication Design भी कहा जाता है वैसे इसका नाम और काम दोनों बहुत है पर इसमें Ideas की planning, Projecting, Visual, Clarity in Graphics, Textual Content और Color Combination का होना एक Graphic Design है, जिस form का use करके हम इसे बनाते है वो भौतिक या आभासी दोनों हो सकता है.

दुसरे शब्दों में कहे तो Graphic Design Images, Words, Size ( Circle, Rectangle, hexagon, Triangle, etc.) और Colors Combination का use करके किसी Messages को ब्यक्त करने का एक माध्यम है जिसे Graphic Designing ( in Hindi ) कहा जाता है.Graphic Design अपने आप में एक बहुत ही बड़ी प्रतिष्ठित काम है जिसके लिए आपके पास Creative Ideas का होना बहुत ही जरुरी है और शायद इसीलिए कहा भी जाता है कि Creativity, Graphic डिजाइन की पहली जरुरत है और इसके अलवा Industry के Traids की अच्छी जानकारी का होना लाजमी है.

वैसे तो Graphic Design के बहुत से function होते है और सबका अलग-अलग नाम भी होता है निचे हम कुछ चुनिन्दा नाम दे रहे है जिसका use Graphic Design के अंतगर्त ज्यादा होता है जैसे; साइनिज, Identity Corporate, packaging, Printed Content, Online Banner, Album, Film And Television, Greeting Card आदि सामिल है.

Graphic Designing Course

India में Graphic Design का कोर्स Diploma और Degree दोनों लेवल पर है और Graphic Design Institutes काफी लम्बे समय से Candidates को Training देते आ रहे है. अगर especially India में Graphics Training Institutes की बात करे तो यह बहुत ही अच्छे और Affordable price पर Graphic Design in Hindi Training provide करते है और उनकी विशेषता होती है की software Application Skill अछे से प्रदान करे, जो बहुत बड़ा Benefits इससे trainee को होता है.

और एक Professional Graphic Designer बनने में एक अच्छा योगदान निभाता है और अच्छी वैचारिक knowledge और skill की बहुत आवश्यकता होती है. Graphic Design, Communication Design का एक Important हिस्सा होता है जो प्रत्येक students को यह पता होना चाहिए एक अच्छा Graphic Designer बनने के लिए उन्हें किन-किन पहलुयो पर विशेष ध्यान देना चाहिए.

निचे हम कुछ विशेष पहलुयो पर प्रकाश दाल रहे है जिससे आपका concept clear हो जायेगा. Typography, Typing Design, Photography, Packaging, Print Designer, साइनेज Design और Identity system etc.

Observation दृष्टिकोण का होना बहुत आवश्यक है ताकि अपने डिजाईन को देख कर ये जान सके की आपका क्लाइंट क्या चाहता है,

Artistic Ability, डिज़ाइनरो को अपने डिजाईन बनाने में सक्षम होना चाहिए ताकि वो क्लाइंट के सामने क्लासिक और यूनिक डिजाईन प्रेजेंट कर सके और अपने Ideas को sketching या Computer program के माध्यम से डिजाईन तैयार कर सके.

Communication Skills, Consumers, Client और दुसरे डिज़ाइनरो के साथ अच्छा Communicate कर सके और सुनिश्चित कर सके की उसके द्वारा बनाये गए डिजाईन Massage सटीकता से प्रतिबिंबित करता है.

Computer Skills, अधिकांशतः Designing का कार्य Computer के द्वारा ही तैयार किया जाता है इसलिए आवश्यक है की आपको Computer Knowledge हो.

And Most Important Creativity, हमें अपने क्रिएटिव आइडियाज को ही डिजाईन का रूप देना होता है इसलिए यह सबसे जरुरी है की हमें consumers के विचारो को एक नए तरीके से सोचने में सक्षम होना चाहिए तभी हम क्लाइंट्स को अपने तरफ मोड़ सकते है.

Fees For Graphic Designing Course

जहाँ तक fee का सवाल है तो इंडिया में Graphics Training Institutes बहुत है और उनका Fees भी अलग-अलग होता है पर एक साधारणतः Graphic Design Course Fee 40,000 के आसपास होता है और maximum fees 1,00,000 के near about होता है 

Jobs After Completing Graphic Designing Course

Bachelor in Fine Arts, Post Graduate In Design, Graduate Diploma In Design, Visual Communication Design, Printing And Media Engineering आदि से अपना Graphic Design in Hindi कोर्स पूरा करने के बाद आप Designing के फील्ड में एक बेहतरीन करियर बना सकते है. इस Globalization के मौजूदा दौर में करियर के संभावनाए बहुत है.

कई ऐसे छोटे-बड़े संस्थान है जो अपने लिए visual Brand ready करवाते है. आप उन संस्थानों के साथ जुड़ कर आसानी से काम कर सकते है. या फिर Graphic Designers की Websites, Magazines, Books, Posters, Banners, computers Games, Product Packaging, Communication, Online Design, Corporate, Identity आदि जैसे जगहों पर अच्छे salary package के साथ काम कर सकते है जो आपके करियर को एक नइ उचाई देगा.

Conclusion

जैसा की मैंने पहले बताया कि Graphic Design In Hindi कोर्स बहुत ही trending फील्ड है इसमें जॉब्स opportunities बहुत है. इसके लिए हमें थोडा सा creative और थोड़ा extra thinking की आवश्यकता होती है तभी हम एक बेहतर Graphic Designer बन सकते है जिसे आपने Graphic Design in Hindi के माध्यम से जाना है, उम्मीद करता है कि आपको यह लेख पसंद आया होगा और अगर ऐसी कोई कमी नजर आई हो तो प्लीज कमेंट में अपना विचार मेंशन करना न भूले. Thanks


Friday, 19 February 2021

system properties क्या है

 




System properties   - SP esa dEI;wVj fd lHkh Software And Hardware tkudkjh  (information) dks crk;k tkrk gS tSlsa fd 

1- os(operating system)   

  - dEI;wVj dks pykus okyk lkW¶Vos;j ftls foaMksl  ds uke ls tkuk tkrk gS A                                                                                                                                                                       2. processor fo your PC       

 -dEI;wVj esa pyus okyh izkslsl dks fu;ak=.k djus okyh gkMZos;j fpi tks izkslslj dgykrk gSa                                                                                                                                                                            

  3.RAM of your PC          

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Tuesday, 9 February 2021

What is Memory (मेमोरी क्या हैं?)


                          PANKAJ SIR यह Device Input Device के द्वारा प्राप्त निर्देशों को Computer में संग्रहण (Store) करके रखता है इसे Computer की याददाश्त भी कहाँ जाता है| मानव में कुछ बातों को याद रखने के लिये मष्तिस्क होता है, उसी प्रकार Computer में डाटा को याद रखने के लिए मेमोरी (Memory)  होती हैं| यह मेमोरी C.P.U का अभिन्न अंग है,इसे Computer की मुख्य मेमोरी (Main memory), आंतरिक मेमोरी (Internal Memory), या प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory) भी कहते हैं| 

     किसी भी निर्देश, सूचना, अथवा परिणामों को स्टोर करके रखना मेमोरी कहलाता हैं|

कंप्यूटरो में एक से अधिक मेमोरी होती है हम उनको सामान्यतः प्राथमिक (Primary) व द्वितीयक (Secondary) मेमोरी के रूप में वर्गीकृत कर सकते है  प्राथमिक मेमोरी अस्थिर (Volatile) तथा स्थिर (Non-Volatile) दोनों प्रकार कि होती है| अस्थिर मेमोरी (Temprery Memory) डेटा को अस्थाई रूप से कंप्यूटर ऑन होने से लेकर कंप्यूटर बंद होने तक ही रखते है अर्थात कंप्यूटर अचानक बंद होने या बिजली के जाने पर कंप्यूटर से डाटा नष्ट हो जाता है स्थिर मेमोरी (Permanent Memory) आपके कंप्यूटर को प्रारंभ करने में सहायक होती हैं| इसमें कुछ अत्यंत उपयोगी फर्मवेयर होते है जो कंप्यूटर को बूट करने में मदद करते है बूटिंग कंप्यूटर को शुरू करने कि प्रक्रिया को कहा जाता है इसे मुख्य मेमोरी कहा जाता हैं| द्वितीयक संग्रहण वह है जो हमारे डाटा को लंबे समय तक रखता है द्वितीयक संग्रहण कई रूपों में आते हैं| फ्लोपी डिस्क, हार्ड डिस्क, सी.डी. आदि |

बिट अथवा बाइट

मेमोरी में स्टोर किया गया डाटा 0 या 1 के रूप में परिवर्तित हो जाता है 0 तथा 1 को संयुक्त रूप से बाइनरी डिजिट कहा जाता हैं| संक्षेप में इन्हें बिट भी कहा जाता हैं| यह बिट कंप्यूटर कि मेमोरी में घेरे गे स्थान को मापने की सबसे छोटी इकाई होती हैं|

8 Bits = 1 Bytes

1024 Bytes = 1 Kilobyte (1 KB)

1024 KB = 1 Megabyte (1MB)

1024 MB = 1 Gigabyte (1 GB)

1024 GB = 1 Terabyte (1 TB)

मेमोरी के प्रकार (Types of Memory)प्राइमरी मेमोरी

 (Primary Memory)प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory)

Memory कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण भाग है जहाँ डाटा, सूचना, एवं प्रोग्राम प्रक्रिया के दौरान उपस्थित रहते है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उपलब्ध रहते है यह मेमोरी अस्थिर मेमोरी होती है क्योकि इसमें लिखा हुआ डाटा कंप्यूटर बंद होने या बिजली के जाने पर मिट जाता है प्राइमरी मेमोरी कहलाती हैं| इसे प्राथमिक मेमोरी या मुख्य मेमोरी भी कहते हैं|

सेकेंडरी मेमोरी क्या हैं?

सेकेंडरी मेमोरी क्या हैं? (What is Secondary Memory)

Secondary Storage Device को Auxiliary Storage Device भी कहा जाता है। यह कम्प्यूटर का भाग नही होती है। इसको कम्प्यूटर में अलग से जोडा जाता है। इसमें जो डाटा स्टोर किया जाता है। वह स्थाई होता है। अर्थात् कम्प्यूटर बंद होने पर इसमें स्टोर डाटा डिलीट नही होता है। आवश्यकता के अनुसार इसको भविष्य में इसमें सेव फाईल या फोल्डरों को खोल कर देख सकते है। या इसमें सुधार कर सकते है। एवं इसको यूजर के द्वारा डिलिट भी किया जा सकता है। इसकी Storage क्षमता अधिक होती है Secondary Storage Device में Primary memory की अपेक्षा कई गुना अधिक डाटा स्टोर करके रख सकते हैं, जो की स्थानांतरणीय (Transferable) होता हैं एवं डाटा को ऐक्सेस करने कि गति Primary Memory से धीमी होती है। Secondary Memory में फ्लॉपी डिस्क, हार्डडिस्क, कॉम्पेक्ट डिस्क, ऑप्टिकल डिस्क, मेमोरी कार्ड, पेन ड्राइव आदि आते हैं|

Hard                         PANKAJ SIR 

Hard Disk या HDD एक ही बात है, ये एक physical disk होती है जिसको हम अपने computer की सभी छोटी बड़ी files store करने के लिये प्रयोग करते है। Hard disk और RAM मे ये फर्क होता है कि, Hard disk वो चीज है जो store करने के काम मे आती है, लेकिन RAM उस storage मे रखी चीजो को चलाने के काम में आती है। जब हम computer को बन्‍द करते है तो RAM मे पडी कोई भी चीज साफ हो जाती है। लेकिन HDD मे computer बन्‍द होने पर भ्‍ाी data erase ni hota Hard disk के अन्‍दर एक disk घुमती है, जितनी तेज disk घुमती है उतनी ज्‍यादा तेजी से ये Data को store या read कर सकती है। Hard disk के घुमने की speed को हम RPM (Revolutions Per Minute) मे नापते है। ज्‍यादातर Hard disk 5400 RPM या 7200 RPM की होती है, जाहिर सी बात है 7200 RPM की hard disk 5400 RPM वाली से ज्‍यादा तेज होती है।

संरचना एवं कार्यविधि

हार्डडिस्क चुम्बकीय डिस्क से मिलकर बनी होती है। इसमें डाटा को पढ़ने एवं लिखने के लिये एक हेड होता है। हार्डडिस्क में एक central shaft  होती है। जिसमें चुम्बकीय डिस्क लगी रहती है। हार्डडिस्क की ऊपरी सतह पर एवं निचली सतह पर डाटा को स्टोर नहीं किया जाता है। बाकि सभी सतहों पर डाटा को स्टोर किया जाता है। डिस्क की प्लेट में Track and Sector होते है। सेक्टर में डाटा स्टोर होता है, एक सेक्टर में 512 बाइट डाटा स्टोर होता है।

डाटा को स्टोर एवं पढ़ने के लिये तीन तरह के समय लगते है। जो निम्न है।
1. Seek Time:-. डिस्क में डाटा को रीढ या राईट करने वाले Track तक पहुँचने में  लगा समय सीक टाइम कहलाता है।
2. Latency time:- Track में डाटा के Sector तक पहुँचने मे लगा समय लेटेंसी टाईम कहलाता है।
3. Transfer Rate:- Sector में डाटा को लिखने एवं पढने में जो समय लगता है। उसे Transfer Rate कहा जाता है।

फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk)

यह प्लास्टिक की बनी होती है जिस पर फेराइट की परत पड़ी रहती है | यह बहुत लचीली प्लास्टिक की बनी होती है| इसलिए इसे फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) कहते है| जिस पर प्लास्टिक का कबर होता है| जिसे जैकेट कहते है| फ्लॉपी (Floppy) के बीचों-बीच एक पॉइंट (Point) बना होता है जिससे इस ड्राइव (Drive) की डिस्क (Disk) घूमती है| इसी फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) में 80 डेटा ट्रेक (Data track) होते है और प्रत्येक ट्रेक (Track) में 64 शब्द स्टोर (Store) किये जा सकते है| यह मेग्नेटिक  टेप (Magnetic tape) के सामन कार्य करती है| जो 360 RPM प्रति मिनिट की दर से घूमती है| जिससे इसकी Recording head के ख़राब हो जाने की समस्या उत्पन्न होती है|

floppy

आकर की द्रष्टि से फ्लॉपी (Floppy) दो प्रकार की होती है :-

5½ व्यास वाली फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk)

3½ व्यास वाली फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk)

 व्यास वाली फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) – इसका अविष्कार सन 1976 में किया गया था तथा यह भी प्लास्टिक की जैकेट से सुरक्षित रहती है| इसकी संग्रह क्षमता 360 KB से 2.44 MB तक की होती है |

 व्यास वाली फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) – इसका प्रयोग (use) सर्वप्रथम एप्पल कंप्यूटर (Apple computer) में किया गया था| जो पिछली फ्लॉपी की अपेक्षा छोटी होती है| इसकी संग्रह क्षमता 310 KB से 2.88 MB तक होती है|

Magnetic Tape

Magnetic tape भी एक Storage Device हैं जिसमे एक पतला फीता होता हैं जिस पर Magnetic Ink की Coading की जाती हैं इसका प्रयोग Analog तथा Digital Data को Store करने के लिए किया जाता हैं | यह पुराने समय के Audio कैसिट की तरह होता हैं Magnetic Tape का प्रयोग बड़ी मात्रा में डाटा Store करने के लिए किया जाता हैं| यह सस्ते होते हैं| आज भी इसका प्रयोग data का Backup तैयार करने के लिए किया जाता हैं |

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Optical Disk

Optical Disk एक चपटा, वृत्ताकार पोलिकर्बिनेट डिस्क होता है, जिस पर डाटा एक Flat सतह के अन्दर Pits के रूप में Store किया जाता हैं इसमें डाटा को Optical के द्वारा Store किया जाता है|

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ऑप्टिकल डिस्क दो प्रकार की होती है।

CD:- सबसे पहले बात करते है सीडी की, सीडी का हम काम्‍पैक्‍ट डिस्‍क के नाम से भी पुकारते हैं ये एक ऐसा ऑप्‍टिकल मीडियम होता है जो हमारे डिजिटल डेटा का सेव करता है। एक समय था जब हम रील वाले कैसेट प्रयोग करते थी, सीडी के अर्विष्‍कार ने ही बाजार में कैसेटों को पूरी तरह से खत्‍म कर दिया। एक स्‍टैंडर्ड सीडी में करीब 700 एमबी का डेटा सेव किया जा सकता है। सीडी में डेटा डॉट के फार्म में सेव होता है, दरअसल सीडी ड्राइव में लगा हुआ लेजर सेंसर सीडी के डॉट से रिफलेक्‍ट लाइट का पढ़ता है और हमारी डिवाइस में इमेज क्रिएट करता है।
DVD:- डीवीडी यानी डिजिटल वर्सटाइल डिस्‍क, सीडी के बाद डीवीडी का आगाज हुआ वैसे तो देखने में दोनों सीडी और डीवीडी दोनों एक ही जैसे लगते है मगर इनकी डेटा कैपसेटी में अंतर होता है सीडी के मुकाबले डीवीडी में ज्‍यादा डेटा सेव किया जा सकता है। मतलब डीवीडी में यूजर करीब 4.7 जीबी से लेकर 17 जीबी तक डेटा सेव कर सकता है। डीवीडी के आने के बाद बाजार में सीडी की मांग में भारी कमी देखी गई।

Flash Drive

Pen Drive को ही Flash Drive के नाम से जाना जाता हैं आज कल सबसे ज्यादा Flash Drive का Use डाटा Store करने के लिए किया जाता है यह एक External Device है जिसको Computer में अलग से Use किया जाता हैं | यह आकार में बहुत छोटे तथा हल्की भी होती हैं, इसमें Store Data को पढ़ा भी जा सकता है और उसमे सुधार भी किया जा सकता हैं |

Flash Drive में एक छोटा Pried Circuit Board होता है जो प्लास्टिक या धातु के Cover से ढका होता हैं इसलिए यह मजबूत होता है | यह Plug-and-Play उपकरण है | आज यह सामान्य रूप से 2 GB, 4 GB, 8 GB, 16 GB, 32 GB, 64 GB, 128 GB आदि क्षमता में उपलब्ध हैं|

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Memory Card

मेमोरी कार्ड छोटा स्टोरेज माध्यम माना जाता है जिसका उपयोग आमतौर पर सूचनाओं को संग्रहीत करने के लिए किया जाता है। मेमोरी कार्ड एक प्रकार का स्टोरेज मीडिया है जो अक्सर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में फोटो, वीडियो या अन्य डेटा स्टोर करने के लिए उपयोग किया जाता है। आमतौर पर मेमोरी कार्ड का उपयोग करने वाले उपकरणों में डिजिटल कैमरा, डिजिटल कैमकोर्डर, हैंडहेल्ड कंप्यूटर, एमपी 3 प्लेयर, पीडीए, सेल फोन, गेम कंसोल और प्रिंटर शामिल हैं। इसका उपयोग छोटे, पोर्टेबल और दूरस्थ कंप्यूटर उपकरणों के लिए भी किया जाता है।

मेमोरी कार्ड के प्रकार के आधार पर स्टोरेज स्पेस की मात्रा में भिन्न हो सकते हैं। हालांकि, सामान्य तौर पर, अधिकांश मेमोरी कार्ड आज आकार में 4 जीबी (गीगाबाइट) से लेकर 128 जीबी तक होते हैं। पुराने मेमोरी कार्ड 4 जीबी से भी छोटे होते थे|

बाजार पर विभिन्न प्रकार के मेमोरी कार्ड उपलब्ध हैं, सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले प्रकार के मेमोरी कार्ड की अधिक जानकारी के लिंक नीचे सूचीबद्ध हैं।

  • CF (CompactFlash)
  • MicroSD
  • MMC
  • SD Card
  • SDHC Card
  • SmartMedia Card
  • Sony Memory Stick
  • xD-Picture Card

Zip Drive

ज़िप ड्राइव एक छोटी, पोर्टेबल डिस्क ड्राइव है जिसका उपयोग मुख्य रूप से व्यक्तिगत कंप्यूटर फ़ाइलों का बैकअप लेने और स्टोर करने के लिए किया जाता है। ट्रेडमार्क युक्त ज़िप ड्राइव को 1990 के मध्य में Iomega Corporation द्वारा विकसित किया गया था। जिप ड्राइव और डिस्क दो आकारों में आते हैं। 100 मेगाबाइट का आकार वास्तव में 100,431,872 बाइट डेटा या 70 फ़्लॉपी डिस्केट के बराबर होता है। 250 मेगाबाइट ड्राइव और डिस्क भी है। Iomega ज़िप ड्राइव एक सॉफ़्टवेयर उपयोगिता के साथ आता है जो आपको अपनी हार्ड ड्राइव की संपूर्ण सामग्री को एक या अधिक ज़िप डिस्क पर कॉपी करने देता है। यह लॉन्च के समय लोकप्रिय था क्योंकि प्रति स्टोरेज इकाई लागत हार्ड डिस्क की तुलना में कम थी, और यह एक फ्लॉपी डिस्क की तुलना में बड़ी मात्रा में डेटा स्टोर कर सकती थी। ज़िप ड्राइव तेजी से डेटा ट्रान्सफर करने में सक्षम टिकाऊ और विश्वसनीय थी|

Magnetic Disk

मैग्नेटिक डिस्क एक स्टोरेज डिवाइस है जो डेटा को Write, Rewrite और Access करने के लिए मैग्नेटाइजेशन प्रक्रिया का उपयोग करता है। यह एक चुंबकीय कोटिंग के साथ कवर किया गया है और ट्रैक्स, स्पॉट और सेक्टर के रूप में डेटा संग्रहीत करता है। हार्ड डिस्क, जिप डिस्क और फ्लॉपी डिस्क चुंबकीय डिस्क के सामान्य उदाहरण हैं।

चुंबकीय डिस्क में मुख्य रूप से एक घूर्णन चुंबकीय सतह (rotating magnetic surface) और एक यांत्रिक भुजा (mechanical arm) होती है जो उस पर चलती है। मैकेनिकल आर्म का उपयोग डिस्क से पढ़ने और लिखने के लिए किया जाता है। चुंबकीय डिस्क पर डेटा को एक चुंबकीयकरण प्रक्रिया का उपयोग करके पढ़ा और लिखा जाता है। डेटा को डिस्क पर ट्रैक और सेक्टर के रूप में व्यवस्थित किया जाता है, जहां ट्रैक डिस्क के परिपत्र विभाजन होते हैं। ट्रैक को उन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है जिनमें डेटा के ब्लॉक हैं। चुंबकीय डिस्क पर सभी पढ़ने और लिखने का कार्य क्षेत्रों पर किया जाता 

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