Monday, 9 March 2020

कंप्यूटर विंडोज क्या है हिन्दी में



Window कंप्यूटर का ओ एस  यानि ऑपरेटिंग सिस्टम है  जिसे  कंप्यूटर  की आत्मा माना जाता है  जिसके बिना कंप्यूटर नहीं चल सकता |
Window शब्द माइक्रोसॉफ्ट के GUI ऑपरेटिंग सिस्टम Ms Windows के विभिन्न संस्करणों के लिए उपयोग किया जाता है जिसमे हमे एक ऐसा वातावरण मिलता है जिसमे सभी सुविधाए चित्रात्मक रूप में आइकॉन, मेन्यु, बटनों आदि के रूप में मिलती है | इस 
 सिस्टम का नाम विंडोज इसलिए रखा गया क्योकि इसमें प्रत्येक सॉफ्टवेयर एक आयताकार ग्राफ़िक्स बॉक्स के रूप में खुलता है, जो खिड़की की चौखट के सामान होता है और जिसके माध्यम से हम आज कंप्यूटर को  केवल की-बोर्ड से टाइप होने वाले अक्षरों से निकलकर एक नए वातावरण के रूप में देख पाए | यह चित्रात्मक वातावरण कंप्यूटर की दुनिया को रोचक और सरल बनाने क्र द्रष्टि से बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ है |
Windows सबसे पहले डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम के अंतर्गत एक सॉफ्टवेयर के रूप में आया जिसका windows 3.1 संस्करण बहुत लोकप्रिय हुआ | इसके बाद सन 1995 में यह windows 95 के नाम से एक संपूर्ण ऑपरेटिंग सिस्टम के रूप में जारी हुआ जिसके अब तक Windows 95, Windows 98, Windows 2000, Windows Me, Windows XP, Windows NT, Windows Vista, Windows 7, Windows 8, Windows 8.1, Windows 10 आदि अनेक संस्करण जारी हुए|

computer सॉफ्टवेयर क्या होता हैं

सॉफ्टवेयर क्या होता हैं – What is Software in Hindi?

सॉफ्टवेयर, निर्देशों तथा प्रोग्राम्स का वह समूह है जो कम्प्युटर को किसी कार्य विशेष को पूरा करने का निर्देश देता हैं. यह युजर को कम्प्युटर पर काम करने की क्षमता प्रदान करता हैं. सॉफ्टवेयर के बिना कम्प्युटर एक निर्जीव हैं.
Software को आप अपनी आंखों से नही देख सकते हैं. और ना ही इसे हाथ से छूआ जा सकता हैं. क्योंकि इसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता हैं. यह एक आभासी वस्तु हैं जिसे केवल समझा जा सकता है यदि आपके कम्प्युटर में सॉफ्टवेयर नहीं होगा तो आपका कम्प्युटर मृत प्राणी के समान होगा. जो केवल लौह और अन्य धातुओं से बना एक बक्सा मात्र रह जाएगा.
यदि आपके Computer में Browsers नही होता तो आप इस Lesson को नही पढ़ सकते थे. इसके अलावा MS Office, Photoshop, Adobe Reader, Picasa सभी Software है, जो आपको Computer पर अलग-अलग कार्य करने के योग्य बनाते है.
सॉफ्टवेयर आपके कम्प्युटर में जाना फूँकता हैं. उसे काम करने के योग्य बनाता हैं. और सॉफ्टवेयर की मदद से ही आप कम्प्युटर से अपना मन पसंद कार्य करवा पाते हैं| 

सॉफ्टवेयर के विभिन्न प्रकार – Types of Software in Hindi

हम कम्प्युटर का उपयोग विभिन्न कामों के लिए के लिए करते हैं. और ये सभी प्रकार के काम केवल एक सॉफ्टवेयर की मदद से पूरे नही किये जा सकते हैं.
इसलिए काम की जरुरत के हिसाब से अलग-अलग सॉफ्टवेयर बनाये जाते हैं. अध्ययन की सुविधा के लिए सॉफ्टवेयर के दो मुख्य वर्ग बनाए हैं| 
 1. सिस्टम सोफ्टवेयर 
2. Application software 
                                                       (system  software)
System Software वह Software है जो Hardware का प्रबंध एवं नियत्रंण करता है और Hardware एवं Software के बीच क्रिया करने देता है. System Software के कई प्रकार है.

1.1 Operating System  (OS)

Operating System एक ऐसा कम्प्युटर प्रोग्राम होता है जो अन्य कम्प्युटर प्रोग्रामों का संचालन करता है. Operating System उपयोक्ता तथा कम्प्युटर के बीच मध्यस्थ का कार्य करता है. यह हमारे निर्देशो को कम्प्युटर को समझाता है   

 Operating System  (OS)  चार प्रकार के होते है 
  • Windows
  • Mac OS
  • Linux
  • Android


2. Application Software

Application Software को End User सॉफ़्टवेयर कहा जा सकता है, क्योंकि इसका सीधा संबंध उपयोक्ता से होता है. इसे ‘Apps’ भी कहते है. Application Software उपयोक्ता को किसी विशेष कार्य को करने कि आजादी देते है. इनके कई प्रकार है.

2.1 Basic Application

Basic Applications को सामान्य उद्देशीय सॉफ़्टवेयर (General Purpose Software) भी कहा जाता है. यह सामान्य इस्तेमाल के सॉफ़्टवेयर होते है. इनका उपयोग हम रोजमर्रा के कार्यों के लिए करते है.
किसी भी क्म्प्युटर उपयोक्ता को कम्प्युटर पर कार्य करने के लिए Basic Application का इस्तेमाल तो आना ही चाहिए. नीचे कुछ General Purpose Software के नाम दिए जा रहे हैं.
  • Word Processing Programs
  • Multimedia Programs
  • DTP Programs
  • Spreadsheet Programs
  • Presentation Programs
  • Graphics Application
  • Web Design Application

2.2 Specialized Application

Specialized Application को विशेष उद्देशीय सॉफ़्टवेयर (Special Purpose Software) भी कहा जाता हैं. इन सॉफ़्टवेयर को किसी खास उद्देश्य के लिए बनाया जाता है. इनका इस्तेमाल भी किसी कार्य विशेष को करने के लिए होता है. नीचे कुछ विशेष उद्देश्य के लिए बनाये गए प्रोग्राम्स के नाम दिए जा रहे हैं.
  • Accounting Software
  • Billing Software
  • Report Card Generator
  • Reservation System
  • Payroll Management System

Sunday, 8 March 2020

कंप्यूटर माउस क्या है पूरी जानकारी हिंदी में

                                                   (कंप्यूटर माउस क्या है )                          PANKAJ SIR
 
 दुनिया का पहला कम्प्युटर माउस जिसे खुद डगलस सी. एंगलबर्ट ने अपने हाथों में पकडा हुआ है

हम बाहरी दुनिया में चीजों को उठाने, पकड़ने, ले जाने, सरकाने आदि कार्यों के लिए हाथ का इस्तेमाल करते है. लेकिन, यही कार्य आपको कम्प्युटरcomputer पर करना हो तो आप कैसे करेंगे? क्योंकि कम्प्युटर के पास तो हाथ होते नही| फिर कैसे यह कार्य होगा

दरअसल, कम्प्युटर के पास भी इन सब कार्यों के लिए हाथ होता है. जी हाँ, आपने सही पढा एक हाथ. उस हाथ को आप Mouse के नाम से जानते है. तो आइए जानते है कि यह Mouse क्या है? और Mouse का इस्तेमाल कैसे किया जाता है
Mouse एक इनपुट डिवाईस है, जिसका वास्तविक नाम Pointing Device है| Mouse का उपयोग मुख्यत: कम्प्युटर स्क्रीन पर Items को चुनने, उनकी तरफ जाने तथा उन्हे खोलने एवं बदं करने में किया जाता है. Mouse के उपयोग द्वारा युजर कम्प्युटर को निर्देश देता है. इसके द्वारा एक युजर कम्प्युटर स्क्रीन पर कहीं भी पहुँच सकता है|
कम्प्युटर माउस का आविष्कार एक द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) सैनिक
 Douglas C. Engelburt ने सन 1968 में किया था.
साधारण Mouse आमतौर पर वास्तविक Mouse की तरह ही नजर आता है. यह छोटा तथा आयताकार होता है, जो एक केबल के द्वारा कम्प्युटर से जुड़ा होता है. एक Computer Mouse कुछ इस प्रकार का हो सकता है.


इनको आम भाषा में Right Click एवं Left Click कहते है. और तीसरे बटन को Scroll Wheel या फिरकि कहते है. आधुनिक Mouse में तो अब तीन से ज्यादा बटन आने लगे है, जिनका अलग कार्य होता है.

कम्प्युटर माउस के विभिन्न प्रकार – Mouse Type in Hindi

Computer Mouse ने अपना सफर कई चरणों में पूरा किया है. इस दौरान इसके कई अलग-अलग रुप विकसित किए गए. जिन्हे हम मुख्यत: निम्न पांच प्रकार में बांट सकते है.
  • Mechanical Mouse
  • Optical Mouse
  • Wireless Mouse
  • Trackball Mouse
  • Stylus Mouse

1. Mechanical Mouse

इस माउस का आविष्कार सन 1972 में Bill English ने किया था. Mechanical Mouse निर्देशों के लिए एक बॉल का इस्तेमाल करता था. इसलिए इसे Ball Mouse भी कहा जाता हैं. इस बॉल को दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे घुमाया जा सकता था

2. Optical Mouse

Optical Mouse में LED – Light Emitting Diode तथा DSP – Digital Signal Processing तकनीक पर कार्य करता है. इस माउस में कोई भी बॉल नही होती हैं. इसकी जगह पर एक छोटा-सा बल्ब लगा होता है|

3. Wireless Mouse

बिना तार का माउस Wireless Mouse कहलाता है. इसे Cordless Mouse भी कहते है. यह माउस Radiofrequency (RF) तकनीक पर आधारीत होती है. मगर इसकी बनावट Optical Mouse की तरह होती है.
इसलिए इसका उपयोग करने के लिए एक Transmitter तथा Receiver की जरूरत होती है. Transmitter तो माउस में ही बना होता है. और Receiver को अलग से बनाया जाता है. जिसे कम्प्युटर में लगाया जाता हैं  अतः |इस माउस को चलाने के लिए बैटरी की जरुरत होती है

4. Trackball Mouse

इस माउस की बनावट भी कुछ Optical Mouse की तरह होती हैं. मगर इसमें नियंत्रण के लिए Trackball का इस्तेमाल होता हैं.
कम्प्युटर को निर्देश देने के लिए युजर को अपनी अगुँली या अगुँठे से बॉल को घुमाना पडता हैं. यह माउस हमें ज्यादा नियंत्रण नही देता है. और इसे चलाने में समय भी लगता है.

5. Stylus Mouse

इस प्रकार के माउस को gStick Mouse भी कहा जाता है. क्योंकि Stylus Mouse का आविष्कार Gordan Stewart ने किया था. इसलिए gStick में ‘g’ का मतलब Gordan होता है|
यह माउस एक पेन की तरह दिखाई देता है. जिसमे एक पहिया (Wheel) भी होता है. इस पहिया को ऊपर-नीचे सरकाया जा सकता है. इसका उपयोग अधिकतर Touchscreen Devices के लिए किया जाता है|


माउस द्वारा होने वाले कार्य – 

Functions of Mouse in Hindi

Mouse एक बहुक्रियात्मक उपकरण है, जिसकी सहायता से कई कार्य किय जा सकते है. Mouse का Use कम्प्युटर स्क्रीन पर Items को उठाने, पकड़ने, रखने आदि के लिए अधिकतर किया जाता है.
लेकिन, ये सब कार्य किये कैसे जाते है? इन्हे करने के लिए Mouse कुछ क्रियाएं करता है. ये क्रियाएं क्या है? इन्हे कैसे किया जाता है? आइए, जानते है.

1. Pointing

जब Cursor को कम्प्युटर स्क्रीन पर उपलब्ध किसी Item की तरफ ले जाया जाता है और Pointer उस Item को छूता है तो एक बॉक्स दिखाई देता है जो हमे उस Item के बारे में बताता है. इस सम्पूर्ण क्रिया को Pointing कहते है. इस क्रिया को Hovering के नाम से भी जाना जाता है.
2. Selecting कम्प्युटर स्क्रीन पर किसी Item पर Pointing करने के बाद Mouse के Left Button को एक बार दबाने पर वह Item Select हो जाती है. इसे ही Selecting कहा जाता है. जब कोई Item Select होती है तो उसके चारो तरफ एक वर्ग होता है, जिससे पता चलता है कि यह Item Select किया हुआ है.

3. Clicking

Mouse Button को दबाने कि क्रिया को Click कहते है. Click करने के लिए किसी भी Mouse button को दबाइए और उसे छोड़ दीजिए. Click दो प्रकार की होती है .
1. Left Click: Mouse के Left button को दबाना Left Click कहलाता है. इसके निम्न प्रकार हैं.
  • Single Click –Single Click – Mouse के left button को एक बार दबाना और उसे छोड़ देना Single Click कहलाता है. Single Click के द्वारा किसी Item को select करना, menu को खोलना, किसी Webpage पर उपलब्ध Link को खोलना आदि कार्य किए जाते है.
  • Double Click – Mouse के left button को एक साथ दो बार जल्दी से दबाने पर Double Click होती है. Double Click एक तरह से शॉर्टकट कि तरह कार्य करती है. इसके द्वारा किसी भी Item, file, program आदि को खोला जा सकता है. इसके अलावा किसी द्स्तावेज में कोई भी शब्द select करने के लिए भी double click का इस्तेमाल किया जाता है.
  • Triple Click – Mouse के left button को एक साथ तीन बार जल्दी से दबाने पर Triple Click होती है. Triple Click का उपयोग बहुत ही कम किया जाता है. इसके द्वारा किसी दस्तावेज में पूरे पैराग्राफ को select किया जा सकता है.
2. Right Click: Mouse के Right button को दबाना Right Click कहलाता है. किसी Item पर Right Click करने से उस Item के साथ किये जा सकने वाले कार्यों कि एक list खुलती है.

4. Dragging and Dropping

Mouse के द्वारा कम्प्युटर स्क्रीन पर उपलब्ध किसी भी item को एक स्थान से दूसरे स्थान पर रखा जा सकता है. इसके लिए Mouse की Dragging and Dropping क्रिया का इस्तेमाल किया जाता है.
Mouse Pointer के द्वारा किसी item को select करने के लिए left button को उस item पर दबाएं रखे और उस item को उसके वांछित जगह तक खींच कर ले जाए और button को छोड़ दे. इस संपूर्ण कार्य (खींचना और छोड़ना) को Dragging and Dropping कहा जाता है.

5. Scrolling

Mouse Wheel द्वारा किसी Document, Webpage को ऊपर-नीचे सरकाना Scrolling कहलाता है. ऊपर की तरफ सरकाने के लिए Wheel को अपनी तरफ घुमाना पड़ता है और नीचे की तरफ सरकाने के लिए बाहर की तरफ घुमाना पड़ता है

कंप्यूटर मॉनिटर क्या है पूरी जानकारी हिंदी में

MONITOR 
मॉनिटर को कंप्यूटर का चित्रत्मिक डिवाइस माना जाता है 

Monitor एक आउटपुट डिवाइस है। इसको विजुअल डिस्प्ले यूनिट भी कहा जाता है। यह देखने में टीवी की तरह होता है। माॅनीटर एक सबसे महत्वपूर्ण आउटपुट डिवाइस है। इसके बिना कम्प्यूटर अधूरा होता है। यह आउटपुट को अपनी स्क्रीन पर Soft Copy के रूप में प्रदर्शित करता है। माॅनिटर द्वारा प्रदर्शित रंगों के आधार पर यह तीन प्रकार के होते है।
1.

मोनोक्रोम (Monochrome)

यह शब्द दो शब्दों मोनो (Mono) अर्थात एकल (Single) तथा क्रोम (Chrome) अर्थात रंग (Color) से मिलकर बना है इसलिये इसे Single Color Display कहते है तथा यह मॉनीटर आउटपुट को Black & White रूप में प्रदर्शित (Display) करता है|
2.

ग्रे-स्केल (Gray-Scale)

यह मॉनीटर मोनोक्रोम जैसे ही होते हैं लेकिन यह किसी भी तरह के Display को ग्रे शेडस (Gray Shades) में प्रदर्शित (Show) करता हैं इस प्रकार के मॉनीटर अधिकतर हैंडी कंप्यूटर जैसे लैप टॉप (Laptop) में प्रयोग किये जाते हैं
3.

रंगीन मॉनीटर (Color Monitors)

ऐसा मॉनीटर RGB (Red-Green-Blue) विकिरणों के समायोजन के रूप में आउटपुट को प्रदर्शित करता है सिद्धांत के कारण ऐसे मॉनीटर उच्च रेजोल्यूशन (Resolution) में ग्राफिक्स (Graphics) को प्रदर्शित करने में सक्षम होते हैं कंप्यूटर मेमोरी की क्षमतानुसार ऐसे मॉनीटर 16 से लेकर 16 लाख तक के रंगों में आउटपुट प्रदर्शित करने की क्षमता रखते हैं |

                                        Types of Monitor 

                                         (मॉनिटर के प्रकार)

  • 1.CRT Monitor
  • 2.Flat Panel Monitor
  • 3.LCD (Liquid Crystal Display)
  • 4.LED ( Light Emitting Diode)
1. 

CRT Monitor

CRT Monitor सबसे ज्यादा Use होने वाला Output Device हैं जिसे VDU (Visual display Unit) भी कहते हैं इसका Main Part cathode Ray tube होती हैं जिसे Generally Picture tube कहते हैं अधिकतर मॉनीटर में पिक्चर ट्यूब एलीमेंट होता है जो टी.वी. सेट के समान होता है यह ट्यूब सी.आर.टी. कहलाती है सी.आर.टी. तकनीक सस्ती और उत्तम कलर में आउटपुट प्रदान करती है CRT में Electron gun होता है जो की electrons की beam  और cathode rays को उत्सर्जित करती है ये Electron beam, Electronic grid से पास की जाती है ताकि electron की Speed को कम किया जा सके CRT Monitor की Screen पर फास्फोरस की Coding की जाती है इसलिए जैसे ही electronic beam Screen से टकराती है तो Pixel चमकने लगते हैं और Screen पर Image या Layout दिखाई देता हैं 
2.

Flat panel Monitor

CRT तकनीक के स्थान पर यह तकनीक विकसित की गयी जिसमे कैमीकल व गैसों को एक प्लेट में रखकर उसका प्रयोग Display में किया जाता है यह बहुत पतली स्क्रीन (Screen) होती है| flat Panel वजन में हल्की तथा बिजली की खपत कम करने वाली होती है इसमें द्रवीय क्रिस्टल डिस्प्ले (Liquid Crystal Display-LCD) तकनीक प्रयोग की जाती है LCD में CRT तकनीक की अपेक्षा कम स्पष्टता होती है इनका Use Laptop आदि में किया जाता हैं

3.

LCD (Liquid Crystal Display)

CRT Monitor बिलकुल टेलीविजन की तरह हुआ करते थे  Technology के विकास के साथ Monitor ने भी अपने रूप बदले और आज CRT Monitor के बदले LCD Monitor प्रचलन में आ गए है यह Monitor बहुत ही आकर्षित होते हैं Liquid Crystal Display को LCD के नाम से भी जाना जाता हैं यह Digital Technology हैं जो एक Flat सतह पर तरल क्रिस्टल के माध्यम से आकृति बनाता हैं यह कम जगह लेता है यह कम ऊर्जा लेता है तथा पारंपरिक Cathode ray tube Monitor की अपेक्षाकृत कम गर्मी पैदा करता हैं  यह Display सबसे पहले Laptop में Use होता था परन्तु अब यह स्क्रीन Desktop Computer के लिए भी प्रयोग हो रहा हैं |

LED (Light Emitting Diode)

LED मॉनीटर आज बाजार में मॉनीटर के नवीनतम प्रकार हैं। ये फ्लैट पैनल हैं, या थोड़ा घुमावदार डिस्प्ले जो बैक- लाइटिंग के लिए कोल्‍ड कैथोड फ्लोरोसेंट (CCFL) की बजाय बैक-लाइटिंग के लिए light-emitting diodes का उपयोग करते हैं। एलईडी मॉनीटर, सीआरटी और एलसीडी की तुलना में बहुत कम बिजली का उपयोग करते है और उन्हें पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है।


                                                      

कंप्यूटर सी पी यू क्या होता है पूरी जानकारी हिंदी में


1.सी .पी.यू-   
  
 कंप्यूटर - (Full from of CPU _central processing unit ) का वह भाग जो कंप्यूटर में चलने वाले सभी कार्य एबम उसकी प्रोसेसिंग को नियंत्रण   करता हे अर्थात (सी पी यू ) को ही कंप्यूटर  का मुख्य भाग माना जाता हे इसे कम्प्यूटर का ब्रेन कहा जाता है । यह कम्प्यूटर सिस्टम के सारे कार्यों को नियंत्रित करता है तथा यह इनपुट को आउटपुट में रूपान्तरित करता है । यह इनपुट तथा आउटपुट यूनिट से मिलकर पूरा कम्प्यूटर सिस्टम बनाता है ।


आमतौर पर नये Users या जानकारी के अभाव में लोग CPU को ही कम्प्युटर समझने लगते हैं.\मगर ये गलत हैं CPU तो कम्प्युटर का एक छोटा-सा मगर एक बहूत ही महत्वपूर्ण अंग हैं\ जो motherboard  में लगा रहता हैं.
CPU अपना कार्य तीन सहायक उपकरणों की सहायता से पूरा करता हैं\ जिनके नाम नीचे दिये जा रहे हैं\
  1. Memory
  2. Control Unit
  3. ALU

1. Memory

Memory को आप कम्प्युटर का गोदाम या भंडार ग्रह भी समझ सकते हैं. क्योंकि इसमे Data को Store किया जाता हैं. CPU प्राप्त निर्देशों और डाटा को पहले अपनी स्मृति में भंडारित करता हैं और फिर दुबारा Data को Process करने के बाद भी उसे Memory में ही Store करता हैं. जिसे User कभी इस्तेमाल कर सकता हैं |
इस कार्य के लिए कम्प्युटर अलग-अलग Memory काम मे लेता हैं. जिस Memory में Unprocessed Data (Input) रखा जाता हैं उसे प्राथमिक स्मृति (RAM) कहा जाता हैं. और जिस Memory में Processed Data (Output) भेजा जाता हैं उसे द्वितीयक स्मृति (ROM) कहा जाता हैं

2. Control Unit

Control Unit जिसे CU भी बोलते हैं कम्प्युटर का Manager होता हैं. जो सभी Operations को नियत्रिंत करता हैं| Control Unit Memory, Logical Unit, Input & Output Devices को बताता हैं कि किसी प्रोग्राम से प्राप्त निर्देशों का किस प्रकार पालन करना हैं|
Control Unit Memory से निर्देश प्राप्त करती हैं और उसे Decode करके Central Processor को भेज देती हैं. फिर उस Particular Event को Process किया जाता है| और यह प्रकिर्या चलती ही रहती हैं|

3. ALU

ALU का पूरा नाम Arithmetic Logical Unit हैं. यह Unit सिर्फ दो कार्य करती हैं. पहला डाटा पर गणितिय क्रिया करना. और दूसरा, परिणाम देना. ALU CPU की सबसे Complex और Important Part इकाई होती हैं|
ALU गणितीय क्रियाओं में जोड, घटाव, गुणा, भाग आदि करता हैं. और निर्णय देने के लिए डाटा का मिलान, तुलना करना, छांटना आदि कार्य करता हैं. फिर किसी निर्णय पर पहुँचता हैं. जिसे Output कहा जाता हैं | एक काम पूरा होने के बाद पुन: दूसरा काम करने के लिए यह प्रक्रिया दोहराई जाती हैं

कंप्यूटर कीबोर्ड क्या है पूरी जानकारी

keyboard (कीबोर्ड )


Keyboard  एक इनपुट डिवाईस है. Keyboard का हिंदी में मतलब कुंजीपटल होता है. इसकी सहायता से हम कम्प्युटर  को निर्देश देते है| Keyboard का  मुख्य उपयोग Text लिखने के लिए किया जाता है |


कीबोर्ड की बनावट – Types of Keyboard Layouts in Hindi

एक कीबोर्ड पर कुंजीयों (Keys) की विशेष जमावट को ही कीबोर्ड लेआउट कहते है | कीबोर्ड लेआउट ही कीबोर्ड की बनावट आकार तथा प्रकार को निर्धारित करता है 
आज कम्प्युटर कीबोर्ड के विभिन्न लेआउट उपलब्ध हैं. दुनिया के अलग-अलग देशों ने अपनी भाषा और लिपि के अनुसार Keyboard Layouts विकसित किये हैं
                     हम इन सभी कीबोर्ड लेआउट को मोटे तौर पर दो वर्गों में बांट सकते है|
  1. QWERTY Keyboard Layout
  2. Non-QWERTY Keyboard Layout

1. QWERTY Keyboard Layout

यह सबसे ज्यादा प्रचलित और उपयोग होने वाला कीबोर्ड लेआउट है| इसे दुनियाभर में अपनाया गया है| और आधुनिक कम्प्युटर कीबोर्ड में इसी लेआउट को ही इस्तेमाल किया जाता है 
QWERTY Layout पर आधारित कुछ अन्य Keyboard  Layouts
  • QWERTY
  • QWERTZ
  • AZERTY
  • QZERTY



 2. Non-QWERTY Keyboard Layout

जिन कीबोर्ड में QWERTY Layout को कुंजीयों की जमावट के लिए इस्तेमाल नही किया जाता हैं, उन्हे Non-QWERTY Keyboard कहते हैं. कुछ Non-QWERTY Keyboard Layouts 

Type of Keyboard Keys

कीबोर्ड में स्थित कुंजीयों के नाम और प्रकार

‘QWERTY’ Layout अब तक का सबसे प्रचलित और दुनियाभर में अपनाया गया पैटर्न है. और इस Lesson में भी इसी प्रकार के Keyboard को उपयोग करना बता रहे है.
आइए, जानते है एक Keyboard में कुल कितनी Keys होती है| कीज का नाम और प्रकार तथा इनका क्या उपयोग है?
एक सामान्य Keyboard में कुल 104 Keys होती है|  तथा इनकी संख्या Keyboard Manufactures और Operating System पर भी निर्भर करती है| |  इसलिए मोटे तौर पर हम कह सकते है कि एक QWERTY Keyboard में लगभग 100 Keys (±) होती है|
की-बोर्ड में मौजूद प्रत्येक कुंजी का अपना विशेष कार्य होता है |  और इसी कार्य के आधार पर इनको निम्न छह श्रेणीयों में बाँटा गया है| जिनका वर्णन इस प्रकार है|
  1. -Function Keys
  2. -Typing Keys
  3. -Control Keys
  4. -Navigation Keys
  5. -Indicator Lights
  6. -Numeric Keypad

1.Function Keys

Function Keys Keyboard में सबसे ऊपर होती है| इन्हें Keyboard में F1 से F12 तक लिखा जाता है. Function Keys का उपयोग किसी विशेष कार्य को करने के लिए किया जाता है. इनका हर प्रोग्राम में अलग कार्य होता है|

2. Typing Keys

सबसे अधिक उपयोग इन्ही keys का होता है| Typing keys में दोनो तरह की keys (alphabet और numbers) शामिल होती है, इन्हे सामुहिक रूप में Alphanumeric keys कहा जाता है Typing keys में सभी तरह के symbols तथा punctuation marks भी शामिल होते है

3. Control Keys

इन keys को अकेले या अन्य keys के साथ कोई निश्चित कार्य करने में इस्तेमाल किया जाता है. एक सामान्य Keyboard में अधिकतर Ctrl key, Alt key, Window key, Esc key का उपयोग Control keys के रूप में किया जाता है. इनके अलावा Menu key, Scroll key, Pause Break key, PrtScr key आदि keys भी control keys में शामिल होती है|

4. Navigation Keys

Navigation keys में Arrow keys, Home, End, Insert, Page Up, Delete, Page Down आदि keys होती है. इनका use किसी document, webpage आदि में इधर-उधर जाने में होता है.

5. Indicator Lights

Keyboard में तीन तरह की Indicator light (संकेतक) होती है. Num Lock, Scroll Lock और Caps Lock.जब Keyboard में पहली light जली होती है तो इसका अर्थ है कि Numeric Keypad चालु है, और यदि ये बंद हो तो इसका अर्थ है कि Numeric Keypad बंद है. दूसरी, light हमें letters के Uppercase और Lowercase के बारे में संकेत करती है. जब, ये बंद होती है तो letter lowercase में होते है, और जब ये चालु होती है तो letter uppercase में होते है. तीसरी, जिसे Scroll Lock के नाम से जाना जाता है. यह हमें scrolling के बारे में संकेत करती है.

6. Numeric Keypad

इन्हे हम Calculator keys भी कह सकते है, क्योंकि एक Numeric keypad में लगभग (कुछ अतिरिक्त) एक calculator के समान ही keys होती है. इनका इस्तेमाल numbers लिखने में किया जाता है

कुछ मुख्य Typing Keys और उनका उपयोग

1. Tab Key

Tab का use एक साथ कई अक्षरों का space देने के लिए किया जाता है. इसके अलावा भी इसके कई उपयोग है. Tab का use कुछ Keyboard Shortcuts में भी किया जाता है.

2. Caps Lock Key

इस key का use सभी letters को uppercase में लिखने के लिए किया जाता है. जब, Caps Lock ऑन रहता है तो सभी letters uppercase में लिखे जाएगें और ऑफ रहने पर lowercase में लिखे जाते है.

3. Shift Keys

Shift Keys का use letter को uppercase में लिखने के लिए किया जाता है. इसके अलावा, किसी key के ऊपर वाले हिस्से को type करने के लिए भी Shift Keys का use किया जाता है.

4. Spacebar

Spacebar Keyboard में सबसे बड़ी key होती है. इसका उपयोग Cursor को एक space आगे खिसकाने के लिए किया जाता है.

5. Enter Key

Enter Key एक महत्वपूर्ण key है. इसका use अगली line शुरू करने के लिए किया जाता है. जब Enter को दबाया जाता है तो Cursor अगली line के शुरूआत में चला जाता है. Enter Key ‘OK’ button का कार्य भी करती है.

6. Backspace

Backspace का use Cursor के आगे के तथा select किए हुए text को delete करने के लिए किया जाता है.

कुछ मुख्य Control Keys और उनका उपयोग

1. Esc Key

Esc Key का use वर्तमान में चालु किसी task को cancel करने के लिए किया जाता है. इसका पूरा नाम Escape Key है.

2. Ctrl Key

Ctrl Key का पूरा नाम Control Key है. इसका use Keyboard Shortcuts में किया जाता है.

3. Alt Key

Alt Key का पूरा नाम Alter Key है, इसका use भी Keyboard Shortcuts में किया जाता है.

4. Window Logo Key

इस Key का use Start Menu  को Open करने के लिए किया जाता है.

5. Menu Key

Menu Key माउस के Right Click के समान ही कार्य करती है. यह किसी चुने हुए प्रोग्राम से संबंधित विकल्पों को open करती है.

6. PrtScr Key

कम्प्युटर स्क्रीन की Image लेने के लिए इस Key का use किया जाता है

Navigation Keys का उपयोग

1. Arrow Keys

Arrow Keys चार होती है- Up Arrow, Down Arrow, Left Arrow तथा Right Arrow. इनका use cursor और Webpage को Arrows कि दिशा में सरकाने के लिए किया जाता है.

2. Home Key

Home Key का use cursor को किसी दस्तावेज के शुरूआत मे लाने के लिए किया जाता है. इसकी सहायता से एक Webpage और Document के एक दम शुरूआत में आ सकते है.

3. End Key

End Key का use cursor को किसी दस्तावेज के आखिर मे लाने के लिए किया जाता है. इसकी सहायता से एक Webpage और Document के एक दम नीचे जा सकते है.

4. Insert Key

Insert Key का use Insert mode को On तथा Off करने के लिए किया जाता है.

5. Delete Key

Delete Key का use Cursor के बाद के text, select किए हुए text तथा files एवं folder को delete करने के लिए किया जाता है.

6. Page Up Key

Page Up Key का use Cursor एवं किसी page को कुछ ऊपर सरकाने के लिए किया जाता है.

7. Page Down Key

Page Down Key का use Cursor एवं किसी page को कुछ नीचे सरकाने के लिए किया जाता है|

Numeric Keypad का उपयोग

Numeric Keypad Keyboard के दांये तरफ होता है. इसमें 0 से 9 तक संख्याए होती है. साथ ही गणीतिय चिन्ह- addition, subtraction, division, multiplication तथा decimal चिन्ह भी होते है.






Numeric Keypad का use संख्याए लिखने के लिए किया जाता है |ये संख्याएं Keyboard में दूसरी जगह भी होती है, लेकिन Numeric Keypad से इन्हे जल्दी से लिखा जा सकता है. इसके अलावा Numeric Keypad का use Navigation Keys की तरह भी कर सकते है Numeric Keypad को इस्तेमाल करने के लिए Num Lock को On रहना चाहिए 

कीबोर्ड का इतिहास – 

Computer Keyboard History in Hindi

कप्युटर कीबोर्ड का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है. मगर,  इसका पूर्वज टाईपराईटर हैं. इसलिए कीबोर्ड को भी टाईपराईटर जितना बुढा माना जा सकता है.
आधुनिक कम्प्युटर कीबोर्ड का आविष्कार, Christopher Latham Sholes, ने सन 1868 में किया था.  क्योंकि इसी दिन इनको आधुनिक टाईपराईटर का पैटेंट हांसिल हुआ था.


Friday, 6 March 2020

कंप्यूटर दो भागो से मिलकर बना हे |

       कम्प्युटर दो भागों से मिलकर बना हुआ  है  \    1. हार्डवेयर 2.सोफ्टवेयर
















                                                                                              हार्डवेयर - 
                           1.कम्प्युटर  का  वह  जिसे हम छू सकते हे पकड़ सकते हे बह हार्डवेयर कहलाता हे जेसे -
(1.सी. पी . यू 
2.मॉनिटर
3.की-बोर्ड
4. माउस
                                                                  
                                                                           Software 
को आप अपनी आंखों से नही देख सकते हैं. और ना ही इसे हाथ से छूआ जा सकता हैं. क्योंकि इसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता हैं. यह एक आभासी वस्तु हैं जिसे केवल समझा जा सकता हैं.
सॉफ्टवेर क्या होता है?
यदि आपके कम्प्युटर में सॉफ्टवेयर नहीं होगा तो आपका कम्प्युटर मृत प्राणी के समान होगा. जो केवल लौह और अन्य धातुओं से बना एक बक्सा मात्र रह जाएगा.
यदि आपके Computer में Browsers नही होता तो आप इस Lesson को नही पढ़ सकते थे. इसके अलावा MS Office, Photoshop, Adobe Reader, Picasa सभी Software है, जो आपको Computer पर अलग-अलग कार्य करने के योग्य बनाते है.
सॉफ्टवेयर आपके कम्प्युटर में जाना फूँकता हैं. उसे काम करने के योग्य बनाता हैं. और सॉफ्टवेयर की मदद से ही आप कम्प्युटर से अपना मन पसंद कार्य करवा पाते हैं.






Modem क्या है 1 -और कितने प्रकार के होते हैं====!

Modem का Full Form होता है “Modulator / Demodulator.” यह एक ऐसा hardware component होता है जो की allow करता है एक computer या दुसरे device क...